वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में भारत ने 7 गोल्ड, 5 सिल्वर, 4 ब्रॉन्ज सहित कुल 16 मेडल जीतकर टेबल में शीर्ष स्थान हासिल किया है। वर्ल्ड नंबर-1 और वर्ल्ड चैम्पियन शीतल देवी उलटफेर का शिकार हो गई हैं। महिला कंपाउंड फाइनल में 18 वर्षीय पायल नाग ने शीतल को 139-136 से हराकर गोल्ड अपने नाम किया। यह एक साल के भीतर शीतल पर पायल की दूसरी जीत है। इससे पहले, उन्होंने जनवरी 2025 में भी शीतल को हराया था। पायल ने करियर में पहली बार सीनियर कैटेगरी में इंटरनेशनल गोल्ड जीता। माउथ पेंटिंग से आर्चरी तक का सफर 2015 में ओडिशा के बलांगीर जिले के एक ईंट भट्टे में बिजली के तार की चपेट में आने से पायल ने अपने दोनों हाथ और दोनों पैर गंवा दिए। उस समय पायल की उम्र सिर्फ 8 साल थी। जब वे अस्पताल से घर लौटीं, तो पड़ोसियों और रिश्तेदारों का रवैया ठीक नहीं था। लोगों ने उनकी मां से कहा, ‘यह बच्ची अब क्या ही करेगी, इसे मार क्यों नहीं देतीं?’ कुछ कर दिखाने का जुनून पायल बताती हैं कि उन कड़वी बातों ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि कुछ बनने का जुनून भर दिया। हाथ नहीं थे, तो पायल की मां ने उनके मुंह में पेन पकड़ाकर कहा, ‘अब यही तुम्हारा हाथ है।’ पायल ने मुंह से लिखना सीखा और फिर स्केचिंग शुरू की। आर्चरी से पहले उन्होंने माउथ-पेंटिंग में राज्य स्तर पर गोल्ड जीता था। पायल के जीवन में एक मोड़ तब आया, जब बिना बताए अनाथालय भेज दिया। वहां वे घरवालों के लिए सिसकती रहीं, लेकिन वही अनाथालय उनकी खेल प्रतिभा का गवाह बना। प्रोस्थेटिक पैरों से धनुष को थामती हैं जब वे पहली बार कटरा के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स पहुंचीं, तो दूसरों को हाथों से धनुष चलाते देख निराश हो गई थीं, लेकिन कोच कुलदीप वेदवान ने उनके साहस को दिशा दी। पायल ने एक अनोखी टेक्निक विकसित की। वे अपने प्रोस्थेटिक पैरों से धनुष को थामती हैं, दांतों से स्ट्रिंग खींचती हैं और कंधे के दबाव से तीर छोड़ती हैं। इसी हैरतअंगेज हुनर को देखकर शीतल ने उन्हें ‘इंडियाज मिरेकल आर्चर’ नाम दिया है।
18 साल की पायल ने वर्ल्ड चैम्पियन शीतल को हराया:सीनियर कैटेगरी में पहली बार जीता गोल्ड, कही जाती हैं ‘इंडियाज मिरेकल आर्चर’