‘डकैत’ में दिखेगी एंग्री लव स्टोरी:अदिवि शेष ने कहा- इंडियन सोल और अमेरिकन टेक्नीक का मेल है ये फिल्म

अदिवि शेष जल्द ही ‘डकैत: ए लव स्टोरी’ में नजर आने वाले हैं। फिल्म में उनके साथ मृणाल ठाकुर भी हैं। अदिवि ने दैनिक भास्कर से बातचीत की- यह प्रेम कहानी होने के बावजूद आपने शीर्षक ‘डकैत’ क्यों चुना? फिल्म का विचार हमारे सिनेमाई जुनून और पुरानी यादों का मेल है। मैं और मेरे करीबी दोस्त व निर्देशक शनि, हम दोनों ही ‘द मैग्निफिसेंट सेवन’ और ‘द गुड, ‘द बैड एंड द अग्ली’ जैसी क्लासिक काउबॉय फिल्मों के प्रशंसक रहे हैं। काफी समय से मेरा मन एक प्रेम कहानी पर काम करने का था, लेकिन मैं उसे पारंपरिक रूप में नहीं देखना चाहता था। हमने सोचा, क्या होगा अगर तपते रेगिस्तान, रेल की पटरियों, बंदूकों और खून-खराबे के उस खौफनाक काउबॉय माहौल के बीच एक ‘एंग्री लव स्टोरी’ बुनी जाए? बस, इसी कल्पना ने ‘डकैत’ को जन्म दिया। यह असल में डकैती के हिंसक बैकड्रॉप में रची गई एक ऐसी प्रेम कहानी है, जहां दो किरदारों के बीच प्यार और नफरत का एक बेहद बारीक और गहरा संघर्ष चलता है। क्या लीड पेयर पूरी तरह से डकैती से जुड़ा है? देखिए जब माहौल ही इतना कठोर हो, तो किरदारों को भी उसी रंग में ढलना पड़ता है। यही वजह है कि यह कहानी एक बिल्कुल अलग और यूनिक संयोजन बनकर सामने आई है। आमतौर पर दर्शक या तो पूरी तरह एक्शन से भरी फिल्म देखते हैं, या फिर एक ऐसी प्रेम कहानी, जहां भावनाएं आंसुओं और गीतों में बहती हैं। लेकिन हमने इस सोच को थोड़ा मोड़ा। हमने तय किया कि इस बार प्यार की बात तो होगी, लेकिन उस नरम, मासूम अंदाज में नहीं, बल्कि गुस्से, टकराव और तीखे जज्बातों के साथ। यानी यह एक ऐसी प्रेम कहानी है, जहां भावनाएं दबी नहीं रहती, बल्कि खुलकर, तेज और कभी-कभी चिल्लाते हुए सामने आती हैं। इस फिल्म में आपने प्यार का कौन सा अनछुआ पहलू छुआ है? फिल्म ‘डकैत’ की प्रेम कहानी पारंपरिक सामाजिक संघर्षों, जैसे जाति, धर्म या अमीरी-गरीबी तक सीमित नहीं है। इसका केंद्र किरदारों की आंतरिक संवेदनाएं और उनके निजी अनुभव हैं। यहां प्रेम को एक बेहद व्यक्तिगत एहसास की तरह दिखाया गया है, जो माता-पिता और संतान के रिश्ते जितना गहरा हो सकता है। जब भावनाएं इतनी निजी हो जाती हैं, तो उनका प्रभाव भी अनोखा बनता है। कहानी इस बात को टटोलती है कि कोई रिश्ता क्यों खास बनता है और टूटने पर भीतर क्या बदल जाता है, यही इसकी असली ताकत है। ‘ एक्शन और इसकी कोरियोग्राफी आपके लिए कैसी रही? मैं अपनी एक्शन कोरियोग्राफी के लिए जाना जाता हूं। मैं नियमित रूप से ‘मास’ फिल्में नहीं करता, बल्कि मुझे ‘हाइपर-रियल’ एक्शन पसंद है, जो दिखने में असली भी लगे और ग्लैमरस भी। अगर मेरी फिल्म में कोई बंदा हवा में उड़ रहा है, तो उसके पीछे एक तार्किक कारण होना चाहिए। इस फिल्म के निर्देशक सुनील, जो मेरे बहुत अच्छे दोस्त भी हैं, उन्होंने सिनेमैटोग्राफी की थी। वह अब डायरेक्टर बन गया है। हम दोनों की एक्शन को लेकर जो अमेरिकन सेंसिबिलिटी है, उसे हम इस फिल्म में लेकर आए हैं। हॉलीवुड की तकनीक और जिस तरह से वे एक्शन को कट और डायरेक्ट करते हैं, हमने उसे इस्तेमाल किया है। आप इसे इंडियन सोल और अमेरिकन टेक्नीक का मेल कह सकते हैं। अनुराग कश्यप से इस प्रोजेक्ट को लेकर पहली बार कब बात हुई? मेरे दोस्त शोभिता धुलिपाला और नागा चैतन्य की शादी का मौका था, जहां अनुराग कश्यप भी मौजूद थे। मैंने मौका देखते ही अनुराग सर का हाथ पकड़ा और उसी माहौल में उन्हें ‘डकैत’ की कहानी सुनानी शुरू कर दी। शादी के जश्न के बीच ही मैंने उन्हें फिल्म के लिए पिच किया और इसी तरह वे हमारे इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बन गए।

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